अखड़ा महासम्मेलन 2013 में पारित प्रस्ताव

झारखण्डी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा के तृतीय महासम्मेलन के सांगठनिक सत्र में भारत के आदिवासी इलाकों में माओवाद के नाम पर हो रहे सैनिक दमन का पुरजोर विरोध किया गया. साथ ही आदिवासी भाषा-संस्कृति और साहित्य संबंधी उपेक्षा के सवाल उठाये गए. सदन का मानना था कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए समूचे आदिवासी इलाके को फौजी छावनी में बदल दिया गया है. सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कठपुतली है और दमन के खिलाफ प्रतिरोध के हर स्वर को दबाया जा रहा है. राजनीतिक-सांस्कृतिक कर्मियों की गिरफ्तारी हो रही है और फर्जी मुठभेड़ों में उन्हें व निर्दोष आदिवासी जनता को मारा जा रहा है.

इस संदर्भ में अखड़ा महासम्मेलन ने कई प्रस्ताव पारित किये, जो इस प्रकार हैं:

प्रस्ताव:
1. आदिवासी इलाकों से सैन्य बल हटाया जाए. बिना शर्त आंदोलनकारियों, संस्कृतिकर्मियों और निर्दोष नागरिकों की रिहाई हो. सभी मुकदमे वापस लिये जाएं.
2. बहुराष्ट्रीय कंपनियों से हुए समझौतों को रद्द करते हुए देश व आदिवासी हित में पुनर्मूल्यांकन किया जाए.
3. त्रिभाषा फार्मूला के तहत मातृभाषा/हिंदी/अंग्रेजी में अध्यापन हो.
4. झारखंड में शिक्षक, पुलिस आदि सभी स्थानीय नौकरियों के प्रवेश परीक्षाओं में झारखंडी भाषाओं में पात्रता परीक्षा अनिवार्य किया जाए.
5. प्राथमिक स्तर से झारखण्डी भाषाओं में शिक्षा और इस हेतु शिक्षकों की नियुक्ति हो और इसमें स्थानीय/आदिवासी/दलित/महिला व अन्य सीमांत समुदायों को प्राथमिकता दी जाए.
6. झारखंडी मूल्यों पर आधारित एकरूप पाठ्यक्रम लागू किया जाए.
7. ‘आदिवासी’ एवं ‘होड़ संवाद’ पत्रिकाओं का नियमित मासिक प्रकाशन अविलंब शुरू हो तथा झारखंडी भाषा के पत्रिकाओं के लिए प्रोत्साहक विज्ञापन नीति बनायी जाए.
8. केन्द्रीय झारखण्डी भाषा-साहित्य अकादमी का गठन किया जाये और इसके साथ ही भाषावार साहित्य अकादमियां भी गठित की जाए.
9. आदिम आदिवासियों के भाषायी संरक्षण एवं विकास के लिए अलग से निकाय गठित हो तथा तत्काल उनका भाषायी सर्वेक्षण किया जाए.
10. द्वितीय राजभाषा की सूची से उड़िया और बांग्ला को विलोपित किया जाए तथा अन्य कियसी भी गैर-झारखंडी भाषा को राज्य की द्वितीय राजभाषा की सूची में शामिल नहीं किया जाए.
11. चोकाहातु ससनदिरी को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया जाए.
12. आदिवासी धर्म कोड तत्काल प्रभाव से लागू हो.
13. झारखंड में डोमिसाइल लागू हो.


सरकार से माँग
14. झारखण्डी इतिहास और झारखण्ड आंदोलन पर आंदोलनकारियों एवं इतिहासकारों के एक संयुक्त पैनल के द्वारा पुनर्लेखन हो.
15. आदिवासियों के पवित्र व पूजनीय स्थलों, समाधि इत्यादि की पवित्रता, सुरक्षा और संरक्षण को उच्च प्राथमिकता दी जाए.
16. खनन/उद्योग से नष्ट होते ऐतिहासिक-पुरातात्विक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण किया जाए.
17. शहर के प्रमुख चौराहों एवं सार्वजनिक स्थलों का नामकरण ऐतिहासिक महानायकों, झारखण्डी शहीदों और प्रतीकों के नाम पर किया जाए तथा प्रतिमाएं स्थापित हों.
18. रांची के पुराने जेल को तत्काल शहीद बिरसा राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए.
19. सभी झारखण्डी पर्व-त्यौहारों पर अवकाश घोषित हो.
20. खेल को प्रोत्साहित करने के लिए विद्यालय स्तर पर खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य हो एवं खेल प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं के साथ जिलावार विस्तार किया जाए.
21. झारखंड में अब तक घटित मानवाधिकार हनन के सभी मामलों का पुनर्निरीक्षण हो, और इसके लिए विशेष जांच आयोग गठित किया जाए.
22. जेपीएससी (झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन) की प्रवेश परीक्षा में झारखंडी भाषाओं को अनिवार्य किया जाए और गैर-झारखंडी वैकल्पिक भाषाओं को विलोपित किया जाए.

अखड़ा महासम्मेलन 2013 में पेश सांगठनिक दस्तावेज यहां पढ़ें. »