सीएनटी-एसपीटी में संशोधन तत्काल रद्द हो, चौथा अखड़ा महासम्मेलन संपन्न

विकास के नाम पर जल-जंगल-जमीन की लूट को आदिवासी नहीं स्वीकारेंगे। राज्य के विकास का पैमाना आदिवासी हितों की रक्षा होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि यहां की भाषा और संस्कृति का विकास किया जाए। साथ ही सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन को तत्काल रद कर जमीनें वापस की जाएं। रविवार को सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित दो दिवसीय चौथा अखड़ा महा सम्मेलन संपन्न हुआ।


इसमें आदिवासी भाषा-संस्कृति और समुदाय के विकास के लिए प्रस्ताव पारित किए गए। इस संबंध में सरकार से मांग भी गई। साथ ही केंद्रीय समिति का चुनाव हुआ और विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देनेवाली शख्सीयतों को सम्मानित किया गया।


डॉ करमचंद्र अहीर अध्यक्ष बने

केंद्रीय समिति के चुनाव में डॉ करमचंद्र अहीर अध्यक्ष चुने गए और वंदना टेटे महासचिव बनीं। गिरिधारी राम गोस्वामी, महेंद्रनाथ गोस्वामी, सूर्यमणि देवी, कृष्ण कुमार सिंह मुंडा, अनंत केसररियार, नितारे चंद्र महतो, घनश्याम गागराई, साधना चाकी, चंद्रकिशोर केरकेट्टा, राजेश डुंगडुंग, कालीदास मुर्मू, श्याम चंद्र टुडू, चैत टोप्पो, सुषमा असुर, सामुएल बिरजिया, मजंरू बिरजिया, जोवाकिम तोपनो, विक्टर कंदीर सदस्य चुने गए।


अखड़ा महा सम्मेलन के प्रस्ताव

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन तत्काल रद कर जमीन वापसी को सख्ती से लागू कर जमीन दिलाई जाए। रांची कॉलेज का नाम झारखंड के किसी शहीद पर रखा जाए। आदिवासी इलाकों से सैन्य बल हटाया जाए, आंदोलनकारियों, संस्कृतिकर्मियों और निर्दोषों को रिहा कर सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों से समझौता रद हो, त्रिभाषा फॉर्मूला (मातृभाषा/अंग्रेजी/हिन्दी) लागू हो। सभी स्थानीय नौकरियों की प्रवेश परीक्षा में झारखंडी भाषा अनिवार्य हो। सभी स्कूलों और कॉलेजों में झारखंडी भाषाओं में पढ़ाई, शिक्षकों की नियुक्ति, आदिवासी-मूलवासी मूल्यों पर आधारित पाठ्यक्रम, झारखंडी भाषा के पत्र-पत्रिकाओं के लिए विज्ञापन नीति बने। केंद्रीय झारखंडी भाषा-साहित्य अकादमी का गठन हो, भाषाई संरक्षण के लिए निकाय का गठन, द्वितीय राजभाषा सूची से ओडिया, बांग्ला को हटाया जाए, आदिवासी धर्मकोर्ड लागू हो। हिन्दी को छोड़ गैर झारखंडी भाषाओं को आर्थिक प्रोत्साहन न मिले। फिल्मी नीति को झारखंडी भाषाओं के विकास के अनुरूप बनाया जाए।


झारखंडी इतिहास का पुनर्लेखन हो

सरकार से मांग की गई कि झारखंड के इतिहास और आंदोलन पर इतिहासकारों का संयुक्त पैनल बनाकर इतिहास का पुनर्लेखन हो। आदिवासियों के पवित्र स्थलों को प्राथमिकता, ऐतिहासिक-पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण, प्रमुख चौक-चौराहों पर झारखंड के शहीदों की प्रतिमा स्थापित करने व सभी स्थानीय पर्व-त्योहारों पर अवकाश घोषित करने की मांग की गई। विद्यालय स्तर पर खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य करने व राज्य में अब तक घटित मानवाधिकार हनन के सभी मामलों के लिए जांच आयोग गठित करने की मांग की गई।


सुशीला धुर्वे को जयपाल सिंह मुंडा राष्ट्रीय आदिवासियत सम्मान

इंदौर की लेखिका सुशीला धुर्वे को जयपाल सिंह मुंडा आदिवासियत सम्मान दिया गया। सम्मानित होनेवाले अन्य लोगों में लेखक पीटर पॉल एक्का, फणींद्रनाथ मांझी, भूजेंद्र प्रसाद नारायण, फिल्मकार मेघनाथ, बिरजिया भाषा समुदाय में नगु बिरजिया (मरणोपरांत), हो भाषा समुदाय में- भोलानाथ गागराई, तिलक बारी, खड़िया में- तेलस्फोर इंदवार, राजेश डुंगडुंग, खोरठा में- मोहम्मद सिराजुद्दीन अंसारी ‘सिराज, महेंद्रनाथ गोस्वामी ‘सुधाकर, कुड़माली में- अधिकांत महतो, शक्तिपदो महतो, कुड़ुख में- विमल कुमार टोप्पो, वासुदेव राम खलखो, मुंडारी में- जुनास कंडुलना (मरणोपरांत), बलदेव मुंडा, नागपुरी में- डॉ गिरिधारी राम गौंझू, पंचपरगिना में बूटन देवी, राजकिशोर सिंह, संताली भाषा में- रवींद्रनाथ सोरेन व दिलीप मुर्मू को सम्मानित किया गया।

चौथा अखड़ा महासम्मेलन 2017 की आयोजन समिति की ओर से वंदना टेटे