‘अखड़ा सम्मान 2017’

‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ हर महासम्मेलन में अपने साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों को भाषा-साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में झारखंड के प्रत्येक भाषा समूह से दो-दो व्यक्तियों को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित करती है। आम तौर पर इनमें एक वरिष्ठ और एक युवा होते हैं। ‘अखड़ा सम्मान’ के अंतर्गत सम्मानित प्रतिभाओं को प्रशस्ति-पत्र, झारखंडी वस्त्रा व प्रतीक चिन्ह् दिए जाते हैं। इस वर्ष सम्मानित होने वाले साहित्यकार-संस्कृतिकर्मी निम्नांकित हैं -

1. असुर आदिवासी समुदाय: चैत टोप्पो और सुखनी असुर

2. बिरजिया आदिवासी समुदाय: नगु बिरजिया (मरणोपरांत)

3. हो आदिवासी समुदाय: भोलानाथ गागराई और तिलक बारी

4. खड़िया आदिवासी समुदाय: तेलस्फोर इंदवार और राजेश डुंगडुंग

5. खोरठा आदिवासी समुदाय: मो. सिराजुद्दीन अंसारी ‘सिराज’ और महेन्द्रनाथ गोस्वामी ‘सुधाकर’

6. कुड़मालि देशज समुदाय: अधिकांत महतो और शक्तिपदो महतो

7. कुड़ुख आदिवासी समुदाय: विमल कुमार टोप्पो और बासुदेव राम खलखो

8. मुण्डारी आदिवासी समुदाय: जुनास कंडुलना (मरणोपरांत) और बलदेव मुंडा

9. नागपुरी देशज समुदाय: डा. गिरिधारी राम गौंझू ‘गिरिराज’ और डा. भुवनेश्वर ‘अनुज’

10. पंचपरगनिया देशज समुदाय: बूटन देवी और राजकिशोर सिंह

11. संताली आदिवासी समुदाय: रविन्द्रनाथ सोरेन और दिलीप मुर्मू

इनके अतिरिक्त हिंदी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए डा. पीटर पौल एक्का, फणीन्द्र नाथ माझी और डा. भूजेन्द्र नारायण प्रसाद ‘आरत’ तथा डॉक्यूमेंट्री सिनेमा के क्षेत्र में मेघनाथ को भी ‘अखड़ा सम्मान 2017’ प्रदान किया गया।